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 राजस्थानी लोक गीत

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KC sharma
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PostSubject: राजस्थानी लोक गीत   Thu Dec 16, 2010 12:07 pm

राजस्थान के प्रचलित लोक गीत
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KC sharma
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PostSubject: Re: राजस्थानी लोक गीत   Thu Dec 16, 2010 12:10 pm

तालरिया मगरिया रे मोरू बाई लारे रया
आयो रे धोरां वालो देश बीरो बिण्जारो रे
बीरो बिण्जारो रे मोरू ने लागे प्यारो रे
बीरो बिण्जारो रे यो म्हाने लागे प्यारो रे
आयो रे धोरां वालो देश बीरो बिण्जारो रे
आयो रे धोरां वालो देश बीरो बिण्जारो रे

कुण थाने बोल्या रे मोरू बाई बोलणा
कुण तो दिनी झिणी गाल बीरो बिण्जारो रे
बीरो बिण्जारो रे मोरू ने लागे प्यारो रे
बीरो बिण्जारो रे मोरू ने लागे प्यारो रे
आयो रे धोरां वालो देश बीरो बिण्जारो रे
आयो रे धोरां वालो देश बीरो बिण्जारो रे

सासूजी बोल्या रे मोरू बाई ने बोलणा
नल्द्ल तो दिनी झिणी गाल बीरो बिण्जारो रे
बीरो बिण्जारो रे मोरू ने लागे प्यारो रे
बीरो बिण्जारो रे मोरू ने लागे प्यारो रे
आयो रे धोरा वालो देश बीरो बिण्जारो रे
आयो रे धोरा वालो देश बीरो बिण्जारो रे
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KC sharma
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PostSubject: Re: राजस्थानी लोक गीत   Thu Dec 16, 2010 12:12 pm

उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे

उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे

उड़ उड़ रे म्हारा, काळा रे कागला

कद म्हारा पीव्जी घर आवे

कद म्हारा पीव्जी घर आवे , आवे र आवे

कद म्हारा पिव्जी घर आवे


उड़ उड़ रे म्हारा काळा र कागला

कद माहरा पीव्जी घर आवे


खीर खांड रा जीमण जीमाऊँ

सोना री चौंच मंढाऊ कागा

जद म्हारा पिव्जी घर आवे, आवे रे आवे

उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे

म्हारा काळा र कागला

कद माहरा पीव्जी घर आवे


पगला में थारे बांधू रे घुघरा

गला में हार कराऊँ कागा

जद महारा पिव्जी घर आवे


उड़ उड़ रे

महारा काळा रे कागला

कद महारा पिव्जी घर आवे

उड़ उड़ र महारा काला र कागला

कद महरा पिव्जी घर आवे


जो तू उड़ने सुगन बतावे

जनम जनम गुण गाऊँ कागा

जद मारा पिव्जी घर आवे , आवे र आवे

जद म्हारा पिव्जी घर आवे


उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे

उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे महारा काळा रे कागला

कद म्हारा पिव्जी घर आवे

उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे


उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे म्हारा काळा रे कगला

जद म्हारा पिव्जी घर आवे
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PostSubject: Re: राजस्थानी लोक गीत   Thu Dec 16, 2010 12:15 pm

अंजन की सीटी में म्हारो मन डोले
चला चला रे डिलैवर गाड़ी हौले हौले ।।

बीजळी को पंखो चाले, गूंज रयो जण भोरो
बैठी रेल में गाबा लाग्यो वो जाटां को छोरो ।।
चला चला रे ।।

डूंगर भागे, नंदी भागे और भागे खेत
ढांडा की तो टोली भागे, उड़े रेत ही रेत ।।
चला चला रे ।।

बड़ी जोर को चाले अंजन, देवे ज़ोर की सीटी
डब्बा डब्बा घूम रयो टोप वारो टी टी ।।
चला चला रे ।।

जयपुर से जद गाड़ी चाली गाड़ी चाली मैं बैठी थी सूधी
असी जोर को धक्का लाग्यो जद मैं पड़ गयी उँधी ।।
चला चला रे ।।
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PostSubject: Re: राजस्थानी लोक गीत   Thu Dec 16, 2010 12:19 pm

गोरी धोरा री धरती रो
पिचरंग पाडा री धरती रो , पीतल पातल री धरती रो, मीरा करमा री धरती रो
कित्रो कित्रो रे करा म्हें वखाण, कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान ...

घर पूंचा भई धर्मजला
घर पूंचा भई धर्मजला
धर्म जला भई धर्म जला

कोटा बूंदी भलो भरतपुर अलवर अर अजमेर
पुष्कर तीरथ बड़ो की जिणरी महिमा चारूं मेर
दे अजमेर शरीफ औलिया नित सत्रों फरमान
रे कित्रो कित्रो रे करा म्हें वखाण, कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान....

दसो दिसावा में गूंजे रे मीरा रो गुण गान
हल्दीघाटी अर प्रताप रे तप पर जग कुरबान
चेतक अर चित्तोड़ पे सारे जग ने है अभिमान
कित्रो कित्रो रे करा म्हें वखाण, कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

घर पूंचा भई धर्मजला
घर पूंचा भई धर्मजला
धर्म जला भई धर्म जला


उदियापूर में एकलिंगजी गणपति रंथमभोर
जैपूर में आमेर भवानी जोधाणे मंडोर
बिकाणे में करणी माता राठोडा री शान
कित्रो कित्रो रे करा म्हें वखान कण कण सून गूंजे जय जय राजस्थान

घर पूंचा भई धर्मजला
घर पूंचा भई धर्मजला
धर्म जला भई धर्म जला

आबू छत्तर तो सीमा रो रक्षक जैसलमेर
किर्ने गढ़ रा परपोटा है बांका घेर घूमेर
घर घर गूंजे मेड़ततणी मीरा रा मीठा गान
कित्रो कित्रो रे करा म्हें वखाण, कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

घर पूंचा भई धर्मजला
घर पूंचा भई धर्मजला
धर्म जला भई धर्म जला

रानी सती री शेखावाटी जंगल मंगल करणी
खाटू वाले श्याम धणी री महिमा जाए न बरणी
करणी बरणी रोज चलावे बायेड़ री संतान
कित्रो कित्रो रे करा म्हें वखाण, कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

गोगा बाबु, तेजो दादू , झाम्बोजी री वाणी
रामदेव की परचारी लीला किण सूं अनजानी
जैमल पता भामाशा री आ धरती है खान
कित्रो कित्रो रे करा म्हें वखाण, कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान


घर पूंचा भई धर्मजला

घर पूंचा भई धर्मजला

धर्म जला भई धर्म जला
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PostSubject: Re: राजस्थानी लोक गीत   Thu Dec 16, 2010 12:22 pm

एक बार आओजी जवाईजी पावणा

थाने सासूजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना

सासूजी ने मालुम होवे म्हारे भाई आज होयो

म्हारे घरे से मौक्ळो काम सासूजी मने माफ़ करो...


एक बार आओजी जवाईजी पावणा......

थाने सुसराजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना

सुसराजी ने मालूम होवे बाप म्हारो सेहर गयो

म्हारे घर से लारलो काम

सुसराजी मने माफ़ करो


एक बार आओजी जवाईजी पावणा......

थाने साळीजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना

साळीजी ने मालुम होवे साढुजी ने भेजू हूँ

म्हारा साढुजी नाचेला सारी रात

साळीजी मने माफ़ करो


एक बार आओजी जवाईजी पावणा......

थाने बुवाजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना

बुवाजी ने मालुम होवे म्हारे भी बुवाजी आया

बुवासासुजी ने जोडू लंबा लंबा हाथ बुवाजी मने माफ़ करो


एक बार आओजी जवाईजी पावणा......

थाने लाडीजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना

लाडीजी बुलावे तो लाडोजी भी आवे है

मैं तो जाऊंला सासरिये आज साथिङा मने माफ़ करो


एक बार आओजी जवाईजी पावणा...........

थाने सासूजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना....

थाने सुसराजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना...

थाने साळीजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना....

थाने बुवाजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना...

थाने लाडीजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना...
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PostSubject: Re: राजस्थानी लोक गीत   Thu Dec 16, 2010 12:28 pm

बना रे बागां में झुला घाल्या

म्हारे हिवडे री, म्हारे जिवड़े री, म्हारे मन डे री कोयल बोले झुला छैल भंवरसा
म्हारे मन डे री कोयल बोले झुला छेल भंवरसा


गोरी ऐ बागां में झुला घाल्या
म्हारे हिवडे रो , म्हारे जिवड़े रो , म्हारे मनडे रो मोरियो नाचे झुला जान कंवरसा
म्हारे मनडे रो मोरियो नाचे झुला जान कंवरसा


बना रे फागण री रुत आई
मैं लुक छिप, मैं छुप छुप, मैं छाने छाने आई , म्हारा छैल भंवरसा
मैं छाने छाने आई , म्हारा छैल भंवरसा


गोरी ऐ रंग गुलाबी थारो
थारे नैणा सूं, थारे गालां सूं , थारे होठा सूं रंग मन म्हारो म्हारी जान कंवरसा
थारा होठा सूं रंग मन म्हारो म्हारी जान कंवरसा


बना रे रंग में रंग रळ जावे
जद मनडे सूं, जद तनडे सूं, जद मन डे सूं मन मिल जावे म्हारा छैल भंवरसा
जद मन डे सूं मन मिल जावे म्हारा छैल भंवरसा


गोरी ऐ प्रीत री डोर न टूटे
इण जनम ने, ऊण जनम ने, सौ जनम में साथ न छूटे म्हारी जान कंवरसा
सौ जनम में साथ न छूटे म्हारा छैल भंवरसा
सौ जनम में साथ न छूटे म्हारी जान कंवरसा

बन्ना रे बागा में झूला डाल्या, म्हारी बन्नी ने झूलण दीजो बन्ना गेन्द गजरा.
बन्ना रे बाग में झूला डाल्या, म्हारी लाडी ने झूलण दीजो बन्ना गेन्द गजरा.
बन्ना रे जैपुरिया ते जाज्यो, म्हारी बन्नी ने रखदी ल्याइजो बन्ना गेन्द गजरा.
बन्ना रे कोटा बून्दी जाज्यो, म्हारी लाडी ने लहेरिओ ल्याइजो बन्ना गेन्द गजरा
बन्ना रे चूडीगड ते जाज्यो, म्हारी लाडी ने चुड्लो ल्याइजो बन्ना गेन्द गजरा.
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PostSubject: Re: राजस्थानी लोक गीत   Mon Jan 31, 2011 2:11 pm

चम चम चमके चुन्दडी बिण्जारा रे

कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे

चम चम चमके चुन्दडी बिण्जारा रे

चम चम चमके चुन्दडी बिण्जारा रे

कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे

कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे


म्हारी तो रंग दे चुन्दडी बिण्जारा रे

म्हारे साहेबा रो , म्हारे पिवजी रो , म्हारा साहेबा रो रंगदे रूमाल रे बिण्जारा रे

म्हारा साहेबा रो रंगदे रूमाल रे बिण्जारा रे

चम चम चमके चुन्दडी बिण्जारा रे

कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे

कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे


जोधाणा सरीखा पैर मैं बिण्जारा रे

कोई सोनो तो घड़े रे सुनार रे बिण्जारा रे

कोई सोनो तो घड़े रे सुनार रे बिण्जारा रे

चम चम चमके चुन्दडी बिण्जारा रे

कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे

कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे


पायल घड़ दे बाजणी बिण्जारा रे

म्हारी नथली पळ्कादार रे बिण्जारा रे

म्हारी नथली पळ्कादार रे बिण्जारा रे

चम चम चमके चुन्दडी बिण्जारा रे

कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे

कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे
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