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 हिंदी की कविता

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KC sharma
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PostSubject: हिंदी की कविता    Thu Dec 16, 2010 12:37 pm

चिर अतीत में ’आज’ समाया,
उस दिन का सब साज समाया,
किंतु प्रतिक्षण गूँज रहे हैं नभ में वे कुछ शब्द तुम्हारे!
’आज सुखी मैं कितनी, प्यारे!’

लहरों में मचला यौवन था,
तुम थीं, मैं था, जग निर्जन था,
सागर में हम कूद पड़े थे भूल जगत के कूल किनारे!
’आज सुखी मैं कितनी, प्यारे!’

साँसों में अटका जीवन है,
जीवन में एकाकीपन है,
’सागर की बस याद दिलाते नयनों में दो जल-कण खारे!’
’आज सुखी मैं कितनी, प्यारे!’

हरिवंशराय बच्चन
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KC sharma
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PostSubject: Re: हिंदी की कविता    Thu Dec 16, 2010 12:39 pm

किसने बनाएवर्णमाला के अक्षर

ये काले-काले अक्षरभूरे-भूरे अक्षर
किसने बनाए

खड़िया नेचिड़िया के पंख ने
दीमकों नेब्लैकबोर्ड ने

किसनेआख़िर किसने बनाए
वर्णमाला के अक्षर

'मैंने...मैंने'-
सारे हस्ताक्षरों को अँगूठा दिखाते हुए
धीरे से बोलाएक अँगूठे का निशान

और एक सोख़्ते मेंग़ायब हो गया

केदारनाथ सिंह
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KC sharma
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PostSubject: Re: हिंदी की कविता    Thu Dec 16, 2010 12:41 pm

अँधेरों से कब तक नहाते रहेंगे ।
हमें ख़्वाब कब तक ये आते रहेंगे ।

हमें पूछना सिर्फ़ इतना है कब तक,
वो सहरा में दरिया बहाते रहेंगे ।

ख़ुदा न करे गिर पड़े कोई, कब तक,
वे गढ्ढों पे चादर बिछाते रहेंगे ।

बहुत सब्र हममें अभी भी है बाक़ी,
हमें आप क्या आजमाते रहेंगे ।

कहा पेड़ ने आशियानों से कब तक,
ये तूफ़ान हमको मिटाते रहेंगे ।

गौरीशंकर आचार्य ‘अरुण’
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KC sharma
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PostSubject: Re: हिंदी की कविता    Thu Dec 16, 2010 12:44 pm

अंतिम बूँद बची मधु को अब जर्जर प्यासे घट जीवन में।
मधु की लाली से रहता था जहाँविहँसता सदा सबेरा,
मरघट है वह मदिरालय अब घिरा मौत का सघन अंधेरा,
दूर गए वे पीने वाले जो मिट्टी के जड़ प्याले में-
डुबो दिया करते थे हँसकर भाव हृदय का 'मेरा-तेरा',
रूठा वह साकी भी जिसने लहराया मधु-सिन्धु नयन में।
अंतिम बूँद बची मधु को अब जर्जर प्यासे घट जीवन में।।
अब न गूंजती है कानों में पायल की मादक ध्वनि छम छम,
अब न चला करता है सम्मुख जन्म-मरण सा प्यालों का क्रम,
अब न ढुलकती है अधरों से अधरों पर मदिरा की धारा,
जिसकी गति में बह जाता था, भूत भविष्यत का सब भय, भ्रम,
टूटे वे भुजबंधन भी अब मुक्ति स्वयं बंधती थी जिन में।
जीवन की अंतिम आशा सी एक बूँद जो बाकी केवल,
संभव है वह भी न रहे जब ढुलके घट में काल-हलाहल,
यह भी संभव है कि यही मदिरा की अंतिम बूँद सुनहली-
ज्वाला बन कर खाक बना दे जीवन के विष की कटु हलचल,
क्योंकि आखिरी बूँद छिपाकर अंगारे रखती दामन में
अंतिम बूँद बची मधु की अब जर्जर प्यासे घट जीवन में।

गोपालदास "नीरज"
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KC sharma
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PostSubject: Re: हिंदी की कविता    Thu Dec 16, 2010 12:47 pm

अब हर फूल खून से नहाया हुआ है, बगीचे सूने पड़े हैं
सुबह की ठंडी हवा में सैर कल की बात हुई

मासूमों का चुंबन लेने से पहले सोचना पड़ता है
कहीं ये एक नई वजह तो नहीं दहशत फैलने की

बारूदी रोशनी के अंधे दौर में
सितार के तार की फीकी पड़ती चमक और
उसके सुरों में डुबो देने वाले अध्यात्म का पता कहीं खो गया है

आजादी में पनपा हुआ प्रेम भी लापता हुआ

स्मृतियों का क्षरण होने से प्रतिकार का साहस भी जाता रहा ।

राग तेलंग
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PostSubject: Re: हिंदी की कविता    Thu Dec 16, 2010 12:49 pm

अग्नि देश से आता हूँ मैं!


झुलस गया तन, झुलस गया मन,
झुलस गया कवि-कोमल जीवन,
किंतु अग्नि-वीणा पर अपने दग्‍ध कंठ से गाता हूँ मैं!
अग्नि देश से आता हूँ मैं!


स्‍वर्ण शुद्ध कर लाया जग में,
उसे लुटाता आया मग में,
दीनों का मैं वेश किए, पर दीन नहीं हूँ, दाता हूँ मैं!
अग्नि देश से आता हूँ मैं!


तुमने अपने कर फैलाए,
लेकिन देर बड़ी कर आए,
कंचन तो लुट चुका, पथिक, अब लूटो राख लुटाता हूँ मैं!

अग्नि देश से आता हूँ मैं!

हरिवंशराय बच्चन
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khan
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PostSubject: Re: हिंदी की कविता    Mon Jan 31, 2011 2:14 pm

अंतिम दिन यह दुनिया
कविता होगी
अंतिम वृक्ष
प्रीत के मरुस्थलों
निपजेगी केवल प्रीत
चिड़िया लेगी फिर विश्राम
वृक्षों की रेशमी छाँव में ।

पहले दिन की तरह
अंतिम दिन यह दुनिया-
फिर से तेरी मेरी होगी ।
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