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 गुदगुदाती शायरी

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khan
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PostSubject: गुदगुदाती शायरी    Sat Dec 18, 2010 8:12 pm

हकीकत समझो या फसाना
अपना समझो या बेगाना
हमारा आपका है रिश्ता पुराना
इसलिये फर्ज था आपको बताना
ठंड शुरू हो गयी है....

प्लीज रोज मत नहाना
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khan
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PostSubject: Re: गुदगुदाती शायरी    Sat Dec 18, 2010 8:46 pm

तुझे पाने की हसरत लिए, हमें एक जमाना हो गया !
नयी नयी शायरी, करते तेरे पीछे,
देख मैं शायर कितना, पुराना हो गया !

मरज में न फरक, तोहफों में खरच अलग !
इलाज में खाली सारा, अपना खज़ाना हो गया !

दिल दर्द से भरा, और जेबें खाली !
ग़म ही इन दिनों, अपना खाना हो गया !

मुद्दतें हो गयी , रोग जाता नहीं दिखता,
अस्पताल ही अब अपना, ठिकाना हो गया !

तू भी तो बाज़ आ कभी , इश्कियापन्ती से 'मजाल'
पागल भी देख तुझे, कब का सयाना हो गया !
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khan
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PostSubject: Re: गुदगुदाती शायरी    Sat Dec 18, 2010 9:09 pm

देकर हाथ दोस्ती का वापिस लिया नहीं जाता

इस नाजुक दोस्ती को जख्म दिया नहीं जाता

सचमुच यह दुनिया बड़ी जालिम है

मेसेज फ्री है फिर भी आपसे किया नहीं जाता।
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khan
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PostSubject: Re: गुदगुदाती शायरी    Sat Dec 18, 2010 9:09 pm

वो हमारा इमतिहान क्या लेगी

मिलेगी नजरों से नजर तो नजर झुका लेगी

उसे मेरी कब्र पर दिया जलाने को मत कहना

वो नादान है दोस्तो अपना हाथ जला लेगी।
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khan
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PostSubject: Re: गुदगुदाती शायरी    Sat Dec 18, 2010 10:26 pm

एक आप हो कितने अच्छे हो!
एक आप हो कि कितने सुंदर हो!
एक आप हो कि कितने सच्चे हो!
और एक हम है कि झूठ पर झूठ बोले जा रहे है!
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Libya
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PostSubject: Re: गुदगुदाती शायरी    Sun Dec 19, 2010 4:48 pm

दिल का दर्द दिल तोड़ने वाले क्या जाने!
प्यार के रिवाजों को ज़माना क्या जाने!
होती है कितनी तकलीफ लड़की पटाने में!
यह घर पर बैठा लड़की का बाप क्या जाने!
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pankaj bedrdi
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PostSubject: Re: गुदगुदाती शायरी    Wed Dec 29, 2010 1:41 am

क्या बहुत अच्छा बहुत मजेदार बहुत ही अच्छा
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khan
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PostSubject: Re: गुदगुदाती शायरी    Wed Dec 29, 2010 12:28 pm

pankaj bedrdi wrote:
क्या बहुत अच्छा बहुत मजेदार बहुत ही अच्छा

घन्यवाद पंकज जी होसला अफजाई के लिए
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khan
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PostSubject: Re: गुदगुदाती शायरी    Tue Jan 04, 2011 1:34 pm

डाली डाली पर नजर डाली
जिसने भी डाली बुरी डाली
हमने जिस डाली पे नजर डाली
माली ने उस डाली को काट डाली
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khan
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PostSubject: Re: गुदगुदाती शायरी    Tue Jan 04, 2011 1:40 pm

खुदा से पानी माँगा ज्यूस दिया
साईकिल मांगी स्कूटर दिया ,
मकान माँगा तो महल दिया ,
दोस्त माँगा तो तुम्हे दिया
इस बार खुदा ने ये जुल्म क्यों किया |
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