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 पंजाबी लोकगीत

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khan
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PostSubject: पंजाबी लोकगीत   Mon Jan 31, 2011 6:55 pm

पंजाब के कुछ चुने हुए लोग गीत
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khan
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PostSubject: Re: पंजाबी लोकगीत   Mon Jan 31, 2011 6:57 pm

काला शाह काला, मेरा काला ई सरदार
गोरेआं नु दफा करो, मैं आप तिल्ले दी तार
काला शाह काला...

सस्ड़ीए तेरे पंज पुत्तर, दो ऐबी दो शराबी
जेहड़ा मेरे हाण दा ओ खिड़आ फुल्ल गुलाबी
काला शाह काला...

सस्ड़ीए तेरे पंज पुत्तर, दो टीन दो कनस्तर
जेहड़ा मेरे हाण दा ओ चला गया ए दफ्तर
काला शाह काला...

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khan
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PostSubject: Re: पंजाबी लोकगीत   Mon Jan 31, 2011 6:58 pm

नी मैं कत्तां परीतां नाल, चरखा चन्नण दा
शाव्वा चरखा चन्नण दा
नी ए विकदा ए वडे बज़ार, चरखा चन्नण दा
शाव्वा चरखा चन्नण दा
नी ए घड़ी ए किसे सुनार, लज्ज लोहे दी
शाव्वा चरखा चन्नण दा

चरखा कूकर देंदा - शाव्वा
कूकर लगी कलेजे - शाव्वा
इक मेरा दिल पया धडके - शाव्वा
दूजे कंगण छणके - शाव्वा

माँ मेरी मैंनू चरखा दित्ता, विच चरखे दे मेखां
माँ राणी मैनू याद पई आवे, जद चरखे वल वेखां
चरखा चन्नण दा...

चरखे दा मैं रंग की आखां, रंग आखां सुनहरी
बाबल मेरे हथ जो फड़या, ते रोया भरी कचहरी
चरखा चन्नण दा...

उचचे बनेरे कां पया बोले, मैं चरखे तंद पावां
वे कांवां मेरा वीर जे आवे, तैनु कुट कुट चूरीआं पावां
चरखा चन्नण दा...

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khan
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PostSubject: Re: पंजाबी लोकगीत   Mon Jan 31, 2011 7:01 pm

नी इक मेरी अख काशनी,
दूजा रात दे उन्नींद्रे ने मारेआ,
शीशे ते तरेड़ पै गयी,
वाल वौंदी ने धयान जदों मारेआ,
इक मेरी अख ....

इक मेरी सस्स चंदरी,
भैड़ी रोही दे किकर तों काली,
गल्ले-कथ्थे वीर भुन्नदी
नाले दवे मेरे माँ-पयां नू गाली,
नी क़ेहडा उस चंदरी दा,
नी मैं लाचीयाँ दा बाग उजाड़आ,
इक मेरी अख काशनी...

दूजा मेरा दियोर निकड़ा,
भैड़ा गोरियाँ रन्ना दा शौंकी,
ढुक ढुक नेह्ड़े बैठदा,
रख सामणे रंगीली चौंकी,
नी इस्से गल तों डरदी ,
अजे तीक वी न घुण्ड नूँ उतारया,
इक मेरी अख काशनी...

तीज़ा मेरा कंत ज़िम्वे,
रात चानड़ी च दुध दा कटोरा,
फिकड़े सिन्दूरी रंग दा,
ओदे नैणा च गुलाबी डोरा,
नी इको गल माड़ी उसदी,
लाईलग नु है माँ ने विगाडिया।

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PostSubject: Re: पंजाबी लोकगीत   Mon Jan 31, 2011 7:02 pm

हीर अक्खाँ जोगिया झूठ बोले
कौण विछड़े यार मिलावदाँ ई
ऐसा कोई ना मिलया वें मैं ढूँढ थकी
जेड़ा गया नूँ मोड़ लेयावँदा ई

मेल रूहाँ दे अज़ल दे रोज़ होए
ते सच्चे इश्क दी न्यूँ तामीर होई
फुल्ल खिल गये पाक मोहब्बताँ दे
कोई राँझा होया, कोई हीर होई

साडे चम दियाँ जुतियाँ करे सोई
जेड़ा ज्यू दा रोग गवावदाँई
भला दस खाँ चिड़ि व छुन्याँ नूँ
कदों रब सच्चा घरीं ले आवदाँई

इक बाज़ तों कंग नू कूंज खोई
वेखाँ चुप है के कुरलावदाँई
दुखाँ वालेयाँ नू गल्लाँ सुखदियाँ ते
किस्से जोड़ जहान सुनावदाँई

इक जट दे खेत नूँ अग्ग लगी
वेखाँ आण के कदों बुझावदाँई
देवाँ चूरियाँ घ्यों दे बाल दिवे
वारस शाह जे सुणा मैं गाँवदाँई

मेरा जूजा मा जेड़ा आण मिले
सिर सदका ओस दे नाणदाँई
भला मोए ते विछड़े कौन मिले
ऐंवे जीवड़ा लोग बुलावदाँई

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PostSubject: Re: पंजाबी लोकगीत   Mon Jan 31, 2011 7:03 pm

लोहड़ी का गीत

कंडा कंडा नी लकडियो कंडा सी
इस कंडे दे नाल कलीरा सी
जुग जीवे नी भाबो तेरा वीरा सी,
पा माई पा, काले कुत्ते नू वी पा
कला कुत्ता दवे वदायइयाँ,
तेरियां जीवन मझियाँ गईयाँ,
मझियाँ गईयाँ दित्ता दुध,
तेरे जीवन सके पुत्त,
सक्के पुत्तां दी वदाई,
वोटी छम छम करदी आई।

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