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 भोजपुरी लोकगीत

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khan
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PostSubject: भोजपुरी लोकगीत    Mon Jan 31, 2011 7:07 pm

भोजपुरी भाषा के लोकगीत
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khan
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PostSubject: Re: भोजपुरी लोकगीत    Mon Jan 31, 2011 7:09 pm


छलकल गगरिया रे मोर निरमोहिया

छलकल गगरिया मोर


बिरही मोरनियाँ मोरवा निहारे

पापी पपिहरा पिउ-पिउ पुकारे

पियवा गइल कउनी ओर निरमोहिया

छलकल गगरिया मोर... कि... छलकल गगरिया मोर

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khan
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PostSubject: Re: भोजपुरी लोकगीत    Mon Jan 31, 2011 7:10 pm

धोबी के गीत

कवना पोखरवा में झिलमिल पनिया कि कवना पोखरवा सेवार,
कवना पोखरवा में चेल्हवा मछरिया कि केहो बिगे महाजाल।
राम पोखरवा में झिलमिल पनिया कि लछुमन पोखरवा सेवार,
सीता पोखरवा में चेल्हवा मछरिया कि रावन फेंके महाजाल।
लाल घोड़वा पर लाल चढ़ि अइले कि उजर घोड़वा भगवान,
सोने पलकिया में सीता चढ़ि अइली कि चँवर डोलावे हनुमान।

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khan
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PostSubject: Re: भोजपुरी लोकगीत    Mon Jan 31, 2011 7:21 pm

सासु मोरा मारे राम बाँस के छिऊकिया
मोर ननदिया रे सुसुकत पनिया के जाय
छोटे-मोटे पातर पियवा हँसि के ना बोले
मोर ननदिया रे से हू पियवा कहीं चलि जाय
गंगा रे जमुनवा के चिकनी डगरिया
मोर ननदिया रे पैयाँ धरत बिछलाय
कहत महेंदर श्याम इहो रे पुरुबिया
मोर ननदिया रे पिया बिनु रहलो ना जाय

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khan
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PostSubject: Re: भोजपुरी लोकगीत    Mon Jan 31, 2011 7:24 pm

धनि-धनि ए सिया रउरी भाग, राम वर पायो।
लिखि लिखि चिठिया नारद मुनि भेजे, विश्वामित्र पिठायो।
साजि बरात चले राजा दशरथ,
जनकपुरी चलि आयो, राम वर पायो।
वनविरदा से बांस मंगायो, आनन माड़ो छवायो।
कंचन कलस धरतऽ बेदिअन परऽ,
जहाँ मानिक दीप जराए, राम वर पाए।
भए व्याह देव सब हरषत, सखि सब मंगल गाए,
राजा दशरथ द्रव्य लुटाए, राम वर पाए।
धनि -धनि ए सिया रउरी भाग, राम वर पायो।

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PostSubject: Re: भोजपुरी लोकगीत    Mon Jan 31, 2011 7:25 pm

खेलत रहलीं सुपली मउनिया, आ गइले ससुरे न्यार।
बड़ा रे जतन से हम सिया जी के पोसलीं, सेहु रघुवर ले-ले जाय।
आपन भैया रहतन तऽ डोली लागल जइतन, बिनु भैया डोलिया उदास।
के मोरा साजथिन पौती पोटरिया, के मोरा देथिन धेनु गाय।
आमा मोरे साजथिन पावती पोटरिया, बाबाजी देतथिन धेनु गाय।
केकरा रोअला से गंगा नदी बहि गइलीं, केकरे जिअरा कठोर।
आमाजी के रोअला से गंगाजी बहि गइलीं, भउजी के जिअरा कठोर।
गोर परूँ पइयाँ परूँ अगिल कहरवा, तनिक एक डोलिया बिलमाव।
मिली लेहु मिली लेहु संग के सहेलिया, फिर नाहीं होई मुलाकात।
सखिया -सलेहरा से मिली नाहीं पवलीं, डोलिया में देलऽ धकिआय।
सैंया के तलैया हम नित उठ देखलीं, बाबा के तलैया छुटल जाय।

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PostSubject: Re: भोजपुरी लोकगीत    Mon Jan 31, 2011 7:26 pm

नक्बेसर कागा ले भागा

अरे मोरा सैंयां अभागा ना जागा,


उड उड कागा मोरी बिंदिया पे बैठा...बिंदिया पे बैठा.

अरे मोरे माथे का सब रस ले भागा,नक्बेसर कागा ले भागा

अरे मोरा सैंयां अभागा ना जागा,


उड उड कागा मोरे नथुनी पे बैठा अरे नथुनी पे बैठा.

मोरे होंठ्वा का सब रस ले भागा,

नक्बेसर कागा ले भागा

अरे मोरा सैंयां अभागा ना जागा,नक्बेसर कागा ले भागा

अरे मोरा सैंयां अभागा ना जागा,


उड उड कागा मोरे चोलिया पे बैठ, अरे चोलिया पे बैठा....

अरे जुबना का सब रस ले भागा, अरे जोबना का सब रस ले भागा

नक्बेसर कागा ले भागा

अरे मोरा सैंयां अभागा ना जागा,


उड उड कागा मोरे करधन पे बैठा अरे साये पे बैठा,

अरे मेरी बुरीयो का सब रस ले भागा मोरा

अरे नक्बेसर कागा ले भागा

अरे मोरा सैंयां अभागा ना जागा,

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